नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने लद्दाख के चर्चित क्लाइमेट एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को बड़ी राहत देते हुए उनकी हिरासत समाप्त करने का फैसला किया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत की गई उनकी हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि यह कदम लद्दाख में शांति, स्थिरता और संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
गृह मंत्रालय के अनुसार, वांगचुक को लद्दाख के लेह में कथित तौर पर भड़काऊ बयान देकर लोगों को उकसाने के आरोप में करीब छह महीने पहले हिरासत में लिया गया था। हालांकि, हालात की समीक्षा और विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के बाद सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का निर्णय लिया है। मंत्रालय ने यह भी बताया कि वांगचुक पहले ही हिरासत की तय अवधि का लगभग आधा समय पूरा कर चुके थे।
सरकार ने अपने बयान में कहा कि लद्दाख में शांति और विश्वास का माहौल बनाना उसकी प्राथमिकता है, ताकि सभी पक्षों के साथ सकारात्मक और सार्थक संवाद संभव हो सके। इसी दिशा में यह फैसला लिया गया है।
दरअसल, राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है, लेकिन परिस्थितियों के आधार पर इसे पहले भी समाप्त किया जा सकता है।
वांगचुक को सितंबर 2025 में लद्दाख में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद गिरफ्तार किया गया था। ये प्रदर्शन लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और संविधान के छठे अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हो रहे थे। उस दौरान प्रदर्शन हिंसक हो गए थे और पुलिस कार्रवाई में चार लोगों की मौत भी हुई थी।
गृह मंत्रालय ने कहा कि केंद्र सरकार लद्दाख के विभिन्न सामाजिक समूहों, संगठनों और सामुदायिक नेताओं के साथ लगातार संवाद कर रही है, ताकि क्षेत्र से जुड़े मुद्दों का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके। मंत्रालय ने यह भी चिंता जताई कि लगातार बंद और विरोध प्रदर्शनों से छात्रों, रोजगार तलाशने वालों, व्यापारियों, पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है।
सरकार ने भरोसा दिलाया कि लद्दाख के लोगों की चिंताओं को दूर करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे और बातचीत के जरिए समाधान खोजने की कोशिश जारी रहेगी।
गौरतलब है कि वांगचुक की पत्नी गीतांजलि अंगमो ने सुप्रीम कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर उनकी हिरासत को गैरकानूनी बताते हुए रिहाई की मांग की थी। हाल ही में अदालत में सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा पेश किए गए भाषण के ट्रांसक्रिप्ट पर भी सवाल उठाए गए थे। इसी बीच केंद्र सरकार ने उनकी हिरासत समाप्त करने का फैसला ले लिया।
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