देहरादून / महाराष्ट्र : उत्तराखंड में साइबर अपराधियों के खिलाफ स्पेशल टास्क फोर्स (STF) का शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एसटीएफ के निर्देशों के क्रम में कार्रवाई करते हुए साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून की टीम ने 84 लाख 70 हजार रुपये की भारी-भरकम साइबर धोखाधड़ी के प्रकरण में वांछित चल रहे एक मुख्य अभियुक्त को महाराष्ट्र के सांगली जिले से गिरफ्तार करने में बड़ी सफलता हासिल की है।
प्रकरण एवं गिरफ्तारी का विवरण
पंजीकृत मुकदमे: यह कार्रवाई साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, देहरादून में दर्ज मु0अ0सं0 75/2024 (धारा 318(4)/61(2) BNS एवं 66(D) IT Act) तथा मु0अ0सं0 71/2024 के तहत की गई है। अभियुक्त इन दोनों ही मामलों में लंबे समय से वांछित चल रहा था।
करोड़ों की ठगी और बैंक खाता: विवेचना के दौरान सामने आया कि वादी द्वारा सितंबर 2024 में धोखाधड़ी की इस रकम में से 29,50,000/- रुपये (उन्तीस लाख पचास हजार रुपये) की बड़ी राशि सीधे इस अभियुक्त से संबंधित फर्स्ट लेयर (First Layer) के ‘बैंक ऑफ महाराष्ट्र’ के खाते में ट्रांसफर की गई थी।
नोटिस के बाद भी असहयोग: विवेचना के दौरान अभियुक्त को सीआरपीसी/बीएनएसएस की धारा 35(3) के तहत नोटिस प्रेषित किए गए थे, लेकिन नोटिस मिलने के बावजूद वह न तो जांच में सहयोग कर रहा था और न ही पुलिस के सामने उपस्थित हो रहा था।
महाराष्ट्र में दबिश: इसके बाद एसटीएफ की विशेष टीम ने तकनीकी साक्ष्यों और सुरागरसी-पतारसी के आधार पर महाराष्ट्र के जिला सांगली में दबिश देकर अभियुक्त को धर दबोचा।
गिरफ्तार अभियुक्त एवं बरामदगी
अभियुक्त का नाम: यासीन युसूफ मनेर (पुत्र युसूफ हानीफ मनार, उम्र- 45 वर्ष, निवासी- 143/2, इंद्रानगर, फाटा मलगाव रोड, मिरज, जिला सांगली, महाराष्ट्र)।
बरामदगी: अभियुक्त के पास से धोखाधड़ी में प्रयुक्त 01 मोबाइल फोन और 01 सिम कार्ड बरामद किया गया है।
सराहनीय कार्रवाई करने वाली साइबर टीम
इस शातिर साइबर अपराधी को दबोचने वाली टीम में निरीक्षक विजय भारती, उपनिरीक्षक रमन बिष्ट और अपर उपनिरीक्षक गोपाल बिष्ट शामिल रहे।
साइबर सुरक्षा सलाह: यदि आप या आपके परिचित किसी भी प्रकार की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के शिकार होते हैं, तो बिना देर किए तत्काल राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें अथवा आधिकारिक पोर्टल https://cybercrime.gov.in पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी शिकायत दर्ज होगी, ठगी गई धनराशि को होल्ड कराने की संभावना उतनी ही अधिक बढ़ जाती है।


