देहरादून/हरिद्वार : हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद घोटाले की जांच में सतर्कता अधिष्ठान उत्तराखंड ने बड़ा कदम उठाते हुए आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। विजिलेंस ने अब अपनी कार्रवाई शुरू कर दी है. बताया जा रहा है कि एफआईआर (First Information Report) में जिन लोगों के नाम शामिल है, उनके ठिकानों पर छापेमारी की कार्रवाई शुरू हो गई है.
फिलहाल जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार विजिलेंस की टीम प्राथमिक तौर पर इस केस जुड़े दस्तावेजों और साक्ष्यों की तलाश में आरोपियों के अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं. सीओ हर्षवर्धिनी सुमन की जांच के बाद इस पूरे प्रकरण में कार्रवाई ने रफ्तार पकड़ी है.
बताया जा रहा है कि उनकी जांच रिपोर्ट में कई अहम तथ्य सामने आए थे. इस प्रकरण में कुछ लोगों पर विभागीय कार्रवाई हुई है, जबकि कुछ के खिलाफ FIR दर्ज की गई है. इसके अलावा एक आईएएस अधिकारी के दिल्ली स्थित आवास पर भी विजिलेंस टीम सर्च के लिए पहुंची है. विजिलेंस मुख्यालय देहरादून से इस पूरी कार्रवाई की सीधी मॉनिटरिंग कर रहा है.
सर्च कार्रवाई में जमीन से जुड़े दस्तावेज, फाइलें और अन्य अहम साक्ष्य खंगाले जा रहे हैं. हरिद्वार के इस जमीन घोटाले को लेकर लंबे समय से सवाल उठ रहे थे. विजिलेंस की सक्रियता से साफ संकेत है कि जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच रही है. आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं. अब सबकी नजर इस बात पर है कि सर्च कार्रवाई में विजिलेंस के हाथ क्या-क्या अहम तथ्य लगते हैं.
पूरा मामला जानिए: दरअसल, साल 2024 में निकाय चुनाव के दौरान हरिद्वार नगर निगम ने सराय ग्राम में 33 बीघा जमीन खरीदी थी. यह जमीन करीब 54 करोड़ रुपए में खरीदी गई थी. लेकिन इस मामले का खुसाला साल 2025 में हुआ. आरोप लगाया गया कि जमीन की मार्केट वैल्यू करीब 15 करोड़ रुपए है, लेकिन हरिद्वार नगर निगम ने इस जमीन को करीब 54 करोड़ रुपए में खरीदा, जहां खरीदी गई जमीन के बराबर में ही हरिद्वार नगर निगम का कूड़ा डंपिंग यार्ड है.
साथ ही ये खेती की जमीन थी, जिसका 143 में लैंड यूज चेंज भी कराया गया था. इसी वजह से इस जमीन की कीमत बढ़ गई थी. सबसे बड़ा सवाल ये खड़ा हुआ था कि ये जमीन किस उद्देश्य से खरीदी गई थी, इसका कारण आज तक पता नहीं चल पाया है.
जांच रिपोर्ट में ये सामने आया था कि निकाय चुनाव के कारण हरिद्वार में उस समय आचार संहिता लगी हुई थी. इसीलिए हरिद्वार नगर निगम का पूरा सिस्टम उस वक्त आईएएस हरिद्वार नगर आयुक्त वरुण चौधरी के हाथ में था. उन्होंने इस जमीन खरीद का स्वीकृति दी थी. इसीलिए सरकार ने इस मामले में हरिद्वार के तत्कालीन मुख्य नगर अधिकारी IAS वरुण चौधरी को सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई है. इसके अलावा तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह को भी मेजर पनिशमेंट देने का फैसला लिया गया है. वहीं तीसरे बड़े अधिकारी पीसीएस अफसर अजय वीर की तीन वेतन वृद्धियों को रोकने के निर्देश दिए गए हैं.
नगर निगम हरिद्वार में ज़मीन खरीद घोटाले के मुख्य बिंदु
- 19 सितंबर 2024 से शुरू होकर जमीन खरीद की कागज़ी प्रक्रिया 26 अक्टूबर को समाप्त हो गई.
- इसके बाद नवंबर माह में तीन अलग अलग तारीखों में, अलग अलग लोगों से 33-34 बीघा जमीन खरीद ली गई.
- जमीन को नगर निगम ने ₹53.70 करोड़ में खरीदी.
- खरीद की प्रक्रिया के दौरान ही भूमि की श्रेणी में बदलाव का खेल हुआ.
- श्रेणी बदलने से 15 करोड़ की जमीन 53.70 करोड़ की हो गई.
- श्रेणी बदलने के लिए 143 की प्रक्रिया तीन अक्टूबर से शुरू होकर 6 अक्टूबर को खत्म हो गई.
- श्रेणी बदलने का यह समय भूमि खरीद की प्रक्रिया के दौरान का है.
- आवेदन की तिथि से परवाना अमलदरामद होने तक मात्र 14 दिन में तत्कालीन एसडीएम अजय वीर सिंह ने सारा काम निपटा दिया.
- एसडीएम कोर्ट में एक अक्टूबर से जो मिश्लबंद (राजस्व वादों की पंजिका) बनता है, उसने चढ़ाने के बजाय नया मिश्लबंद बना दिया.
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